Sangh ka chain cheen maze se been baza raha hai corona article by kaushal kishore Chaturvedi

संघ का चैन छीन मज़े से बीन बजा रहा कोरोना…

कौशल किशोर चतुर्वेदी

कोरोना ने आम आदमी, ख़ास आदमी, सरकारों और असरदारों का जीना तो मुहाल कर ही रखा है लेकिन पिछले 95 साल में जिसने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। आम और ख़ास सबमें , हिंदू-मुसलमान के घर-घर, दिल-दिमाग तक अपनी पैठ बनाई।नदी की धारा के विपरीत बहाव में न केवल तैरे बल्कि अवार्ड भी जीते।कब खुशी मिली कब ग़म,इसकी परवाह नहीं की। चरैवेति चरैवेति का मंत्र जपते रहे और संगठन के निर्माण में खपते रहे। करोड़ों स्वयं सेवकों का ताना बाना बनाकर राज्यों और केंद्र में सरकार बनाने में अहम योगदान देने वाले राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ का चैन छीन कर कोरोना इन दिनों मज़े की बीन बजा रहा है।
संघ की प्रतिनिधि सभा की बैठक के साथ कार्यकारिणी मंडल की बैठक भी कोरोना के कारण नहीं हो सकी थी। कोरोना के चलते सरसंघचालक, सरकार्यवाह और सह कार्यवाह के राष्ट्रीय स्तर कार्यक्रम के राज्यों के पूर्व निर्धारित दौरे भी प्रभावित हुए हैं। लंबे अरसे बाद कोरोना महामारी के कारण संघ की दैनिक शाखा, साप्ताहिक मिलन समारोह और प्रशिक्षण कार्यक्रम के साथ प्रचारकों के चयन करने वाले राष्ट्रीय प्रशिक्षण कार्यक्रम भी आयोजित नहीं हो पाए हैं।कोरोना काल में शीर्ष नेतृत्व के जिम्मेदार पदाधिकारियों का प्रवास स्थगित कर दिया गया है। संघ के मध्य प्रदेश समेत राष्ट्रीय पदाधिकारी क्वारंटाइन रह चुके हैं। इस बार महीनों बाद एक साथ एक स्थान पर टीम भागवत प्रत्यक्ष तौर पर इकट्ठी हुई है।कोरोना संकट के चलते संघ का एजेंडा कुछ समय के लिए पीछे चला गया था, लेकिन अब संघ एक बार फिर चिंतन करने जा रहा है। कोरोना के कहर के बीच देश के हृदय क्षेत्र, मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में इकट्ठे हुए हैं। टीम भागवत की इस विस्तारित बैठक में संघ की अपनी कार्य पद्धति में समय के साथ आवश्यक सुधार पर चिंतन किया जाएगा, तो कोरोनाकाल में अनुषांगिक संगठनों के योगदान अपने प्रचारकों और स्वयंसेवकों की भूमिका की रिपोर्ट भी पेश की जाएगी।
टीम भागवत का मुख्य फोकस राजनीतिक परिवेश पर भी रहेगा, जिसमें वह बदलती दुनिया में भारत के लिए चुनौती को चिन्हित कर अपने रोडमैप को अंतिम रूप दे सकता है।राम मंदिर निर्माण पर आरएसएस की बैठक में मोहन भागवत की मौजूदगी में सरकार के इस काम की ब्रांडिंग की योजना तय होगी।एक तरफ कोरोनावायरस की आपदा के चलते दुनियाभर के देशों में चीन के खिलाफ आक्रोश है। इसी दौरान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत और चीन के बीच सीमा विवाद चल रहा है। चीन की रणनीति के चलते ही भारत और नेपाल के बीच राजनीतिक टकराव की स्थिति है। ऐसे में संघ के मंथन में यह मुद्दे भी प्रमुख होंगे, जिनका केंद्र बिंदु चीन है।सोमवार से शुरू हुई इस चिंतन बैठक में संघ के 20 से ज्यादा प्रमुख राष्ट्रीय पदाधिकारी देश दुनिया के बदलते हालात और चुनौतियों पर अमृत मंथन कर रहे हैं।कोरोना के विष का काट ढूँढकर जहाँ संघ को मैदान में फिर तैनात करने की चुनौती संघ के सामने है जिसमें आनलाइन जैसे फ़ार्मूले की कारगरता परखी जाएगी तो मध्यप्रदेश की 26 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव में संघ के बिना बिकाऊ-टिकाऊ के नारों और अपनों के विरोध में तंत्र के सहारे विजय मंत्र का फ़ार्मूला भी तलाशा जाएगा।

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