satar ki taraf nigahe….intazaar shapath aur mantri mandal vistar ka…article by Kaushal kishore chaturvediji

सत्र की तरफ़ निगाहें … इंतज़ार शपथ और मंत्रिमंडल विस्तार का …

कौशल किशोर चतुर्वेदी

विधानसभा चुनावों में जीत का परचम फहराने वाले विधायकों की निगाह अब विधानसभा पर टिकी हैं। शीतकालीन सत्र होता है या नहीं? यह बड़ा सवाल है। अगर शीतकालीन सत्र सांकेतिक हुआ तब नवनिर्वाचित 28 विधायकों के शपथ का रास्ता भी साफ़ हो पाता है या नहीं, यह भी बड़ा सवाल है। हालाँकि सरकार अनुपूरक बजट लाने का मन बनाती है तो यह सत्र एक से ज़्यादा दिन का भी प्रस्तावित किया जा सकता है। पर अगर शीतकालीन सत्र टालकर सरकार सीधा बजट सत्र पर फ़ोकस करती है तब शपथ का क्या होगा, यह नवनिर्वाचित विधायकों की जिज्ञासा भी है और उन विधायकों के मन में बड़ा सवाल भी है जो चुनाव से ऐन वक़्त पहले तक मंत्री थे लेकिन संवैधानिक प्रावधानों के चलते इस्तीफ़ा देकर उन्होंने नियम का पालन किया था। मंत्री पद से इस्तीफ़ा देने वाले दो दिग्गज नेता कहीं न कहीं जल्दी ही फिर से अपने विभाग संभालने की उम्मीद में है। अगर उनके नाम पहले पाँच मंत्रियों में शुमार न होते तो शायद वह भी विधायक बनने के साथ-साथ मंत्री पद भी सुशोभित करते रहते। और फिर उन्हें मंत्रिमंडल विस्तार की चिंता नहीं करनी पड़ती। पर अब वह कब दोबारा कुर्सी पर बैठते हैं, यह तय करना भाजपा सरकार के मुखिया शिवराज सिंह चौहान पर सीधे-सीधे निर्भर करता है तो भाजपा के शीर्ष नेतृत्व को ही पर्दे के पीछे से पूरी कवायद करनी है कि शिवराज मंत्रिमंडल का स्वरूप अब आगामी लंबी पारी के लिए कैसा होगा ? जिसे तय करने में थोड़ा वक़्त भी लग सकता है। ऐसे में शपथ और मंत्रिमंडल विस्तार का इन्तज़ार बेसब्री पैदा कर सकता है।
गृह एवं संसदीय कार्य मंत्री नरोत्तम मिश्रा के बड़े बयान ने नवनिर्वाचित विधायकों की जल्दी ही सत्र बुलाए जाने की उम्मीद ज़रूर बढ़ाई है । डॉ. मिश्रा ने कहा है कि अगले विधानसभा सत्र में लव जिहाद को लेकर विधेयक लाया जा रहा है।लव जिहाद में 5 साल के कठोर कारावास की सजा का प्रावधान रहेगा।गैर जमानती धाराओं में केस दर्ज होगा।सहयोग करने वाला भी मुख्य आरोपी की तरह अपराधी होगा। शादी के लिए स्वेच्छा से धर्म परिवर्तन करने के लिए एक महीने पहले कलेक्टर के यहां आवेदन करना अनिवार्य रहेगा। जिस तरह इस विधेयक की चर्चा हुई है उसके मुताबिक़ उम्मीद लगायी जा सकती है कि सरकार दिसंबर में शीतकालीन सत्र बुलाकर विधेयक पेश कर सकती है तो अनुपूरक बजट और विधायकों की शपथ जैसे शासकीय कार्य भी संपन्न किए जा सकते हैं। वहीं मंत्रिमंडल विस्तार में समय भी लगे, तब भी सरकार इस्तीफ़ा देने वाले दो पूर्व मंत्रियों को पूर्ववत स्थिति में लाने का फ़ैसला ले सकती है।
हालाँकि अगर सरकार ने शपथ दिलाने का और सत्र बुलाने का फ़ैसला लिया तो प्रोटेम स्पीकर द्वारा नवनिर्वाचित विधायकों को शपथ दिलाने के बाद स्पीकर का चुनाव भी अपेक्षित होगा। ऐसे में यह भी तय करना होगा कि अगला स्पीकर कौन बनेगा ? तो प्रोटेम स्पीकर रामेश्वर शर्मा की भूमिका आगे क्या होगी ? वह मंत्रिमंडल का चेहरा बनेंगे या फिर स्पीकर के तौर पर पारी शुरू करेंगे। ऐसे में शीतकालीन सत्र बुलाए जाने पर सरकार को कुछ फ़ैसले तो जल्दी लेने की बाध्यता में बँधना ही पड़ सकता है।हालाँकि सरकार किसी तरह की बाध्यता से परहेज़ ही करेगी यह बात भी तय है। भाजपा के 19 विधायक चुने जाने के बाद वैसे भी सरकार अब समझौतों के दायरे से बाहर हो चुकी है।
फिर भी मंत्रिमंडल विस्तार सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती है। ग्वालियर-चंबल में विधानसभा चुनाव लड़ने वाले जिन पूर्व विधायकों को मंत्री बनाया गया था, अब वे मंत्री बने रहेंगे…फ़िलहाल यह दावा कोई नहीं कर सकता। क्योंकि अब सरकार को मंत्रिमंडल विस्तार में क्षेत्रीय संतुलन, जातीय संतुलन और अन्य राजनीतिक समीकरणों को भी साधना होगा।ऐसे में शिवराज सरकार के मंत्रिमंडल का स्वरूप वर्तमान से भिन्न होना तय है। ख़ास तौर से विंध्य, महाकौशल, मालवा के महत्वपूर्ण नेताओं को मंत्रिमंडल में शामिल कर असंतोष को ख़त्म करना सरकार की प्राथमिकता रहेगी। सरकार को यह भी तय करना पड़ेगा कि मंत्रिमंडल विस्तार पंचायत चुनाव के पहले किया जाए या बाद में। शीतकालीन सत्र पंचायत चुनाव के बीच बुलाया जाए या फिर टालने पर सहमति बनायी जाए और प्रोटेम स्पीकर से ही काम चलाकर सत्र के अति महत्वपूर्ण शासकीय कार्यों को संपन्न करवाया जाए। इस बीच के रास्ते में हो सकता है सरकार मंत्रिमंडल विस्तार और शपथ जैसे कार्यों को फिलहाल टाल दे और नवनिर्वाचित विधायकों की उम्मीदों का सूरज नए साल में ही प्रतीक्षा के बादलों पर विराम लगाते हुए उजाला करे। तब तक पूर्ण सत्र पर निगाहें टिकी ही रहें और मंत्री बनने और शपथ ग्रहण की रस्म का इंतज़ार भी चैन से न जीने दे।

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