Resignations continue in Legislative Assembly … Legislators in epidemic larger than Corona … Kaushal Kishore Chaturvedi

विधानसभा में इस्तीफ़ों का दौर जारी … विधायकों में कोरोना से बड़ी महामारी …

कौशल किशोर चतुर्वेदी

देश दुनिया जहाँ कोरोना महामारी से जूझ रही है तो मध्य प्रदेश विधानसभा इस्तीफों की बीमारी से निजात नहीं पा रही है। कोरोना काल में जब मध्य प्रदेश में कांग्रेस सरकार इस कवायद में जुटी थी कि विधानसभा सत्र स्थगित रहे।और बेंगलुरू में नाथ से अलग कमल की छाया में जीवन के अडिग फैसलों पर उतारू कांग्रेस विधायक वापस अपनी धरती पर लौटें और मान मनुहार के बाद सरकार पर लगे ग्रहण का ख़ात्मा कर दें। तब नाथ की पुकार को अनाथ बताकर 22 विधायकों के इस्तीफ़े ने यह संकेत तो दे ही दिए थे कि विधायकों का एकमुश्त इस्तीफ़ा कोरोना महामारी पर भी भारी पड़ चुका है।कोरोना की शुरुआत से कोरोना के बढ़ते सफ़र में मध्य प्रदेश विधानसभा में इस्तीफों का दौर लगातार जारी है। हाल ही में बड़ा मलहरा विधायक कुँवर प्रद्युम्न सिंह लोधी के इस्तीफ़े के बाद अब नेपानगर से कांग्रेस विधायक सुमित्रा देवी कास्डेकर ने इस्तीफ़ा दे दिया है।प्रोटेम स्पीकर रामेश्वर शर्मा ने इस्तीफ़ा स्वीकार कर स्थान रिक्त घोषित कर दिया है। यानी कि अब मध्य प्रदेश विधानसभा में इस्तीफ़ा देने वाले विधायकों की संख्या 24 हो गई है।

देश में कोरोना का आंकड़ा 10 लाख पार हो गया है। इसमें मौत की संख्या 25602 है।यानी मौत का आंकड़ा क़रीब 2.55% है।
मध्यप्रदेश की बात करें तो कोरोना से संक्रमित मरीज़ों का आंकड़ा 20 हज़ार पार कर गया है और मौत का आँकड़ा 700 तक पहुँचने को है।यानी मौत का आंकड़ा क़रीब 3.38% है। वहीं मध्य प्रदेश विधानसभा की बात करें तो कुल सदस्य संख्या 230 है इसमें से 24 विधायक इस्तीफ़ा दे चुके हैं।यानी की रिक्त होने वाली सीटों की संख्या 10.43 फ़ीसदी है। वहीं यदि कांग्रेस खेमे में रिक्त होने वाली सीटों के हिसाब से आकलन करें तो यह संख्या 21 फ़ीसदी हो जाती है।यानी की कोरोना की तुलना में मध्य प्रदेश विधानसभा को विधायकों के इस्तीफ़े ने कोरोना से देश को हुए स्थायी नुक़सान की तुलना में क़रीब 300 फ़ीसदी ज़्यादा और मध्यप्रदेश को हुए स्थायी नुक़सान की तुलना में क़रीब 200 फ़ीसदी ज़्यादा नुक़सान पहुँचाया है। और कांग्रेस तो मानो पूरी तरह से लुट ही गई है। सरकार भी गई और दरकार भी गई। अब तो ऐसा लग रहा है कि भाजपा कहीं का भी नहीं छोड़ेगी। मतदाता ही दाता बन जाए तभी कांग्रेस की डूबती लुटिया पार पा सकती है।सुमित्रा का इस्तीफ़ा उसी दिन हुआ है जिस दिन पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के साथ प्रोटेम स्पीकर रामेश्वर शर्मा के सामने बैठे थे। और प्रदेश की जनता के हित में कोरोना से बचाव के लिए भारतीय जनता पार्टी की सरकार और प्रोटेम स्पीकर को अपनी उस सदाशयता का लोहा मनवा रहे थे कि प्रदेश की जनता के हित के फैसलों में कांग्रेस कंधे से कंधा मिलाने को तैयार है। हो सकता है कि सुमित्रा के मन की बात प्रोटेम स्पीकर तक उससे पहले ही पहुँच चुकी होगी।
अब तो ऐसा लग रहा है कि भाजपा नहीं मानो भगवान ही कांग्रेस से रूठ गया है। इस्तीफ़ा देने वाले विधायकों के नाम पर ग़ौर करें तो प्रभुराम, गोविंद, प्रद्युम्न सीनियर, प्रद्युम्न सीनियर, महेंद्र, तुलसी, इमरती देवी, सुमित्रा, बृजेन्द्र,गिर्राज, सुरेश जैसे भगवान नामधारी सभी भाजपा के उस खेमे में चले गए हैं जहाँ नरोत्तम, गोपाल,जगदीश,मोहन,
यशोधरा,भूपेंद्र, बृजेन्द्र और कई राम पहले से ही विराजे हैं। और कमल, विश्वास, ऊषा, अरविंद,विजय भी यहाँ पहले से मौजूद हैं।और सबसे बड़े किरदार खुद शिव इनके मुखिया हैं। अब तो कांग्रेस को नैया पार लगाना है तो प्रभु ब्रह्मा, विष्णु, शिव को मनाना पड़ेगा जो फिलहाल शयन में हैं और सरकारी फ़ाइलें सभी लंबित पड़ी हैं। यानि कि अब क़िस्मत का फैसला चार महीन बाद ही है तब तक गुहार लगाओ, प्रभु प्रसन्न हुए तो मोहिनी रूप धारण कर मतदाताओं पर वह मादक नज़र डालेंगे कि सारे प्रभुनामधारी अमृत पीकर कांग्रेस के खेमे में भी नज़र आ सकते हैं। कोरोना काल का अभिशाप फिर वरदान में बदलकर एक बार फिर वक़्त बदल सकता है लेकिन सब कुछ तभी संभव है जब नारायण ख़ुश हो जाएँ और उनके जागने तक कांग्रेस वेंटिलेटर पर पहुँचने से बची रहे। वरना वेंटिलेटर से वापसी मुश्किल ही मानो प्यारे … शायद प्रभु को भी यही जवाब देना पड़े कि फिलहाल लो मोक्ष का आसन, अगली बार सिंहासन …।

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