Rahat nahi mili toh Ruksat le li article by Kaushal kishore Chaturvedi

राहत नहीं मिली तो रुखसत ले ली …

कौशल किशोर चतुर्वेदी

कोरोना महामारी ने इस दुनिया को बहुत दर्द दिया है। लाखों लोग काल के गाल में समा गए तो करोड़ों लोग संक्रमण का शिकार होकर गहरी वेदना से गुज़रने को मजबूर हुए।हर मौत अपने आप में बड़ी दुखद होती है लेकिन मंगलवार के दिन अगर मध्य प्रदेश पर अमंगल का पहाड़ टूटकर गिरा तो वह था राहत इन्दौरी का कोरोना संक्रमण के चलते ही दुनिया से रुखसत करना।भोपाल में पिछले दिनों कांग्रेस सरकार के समय सरकारी आयोजन में राहत इंदौरी ने न केवल शिरकत की थी बल्कि अपनी शायरी से समा बाँध दिया था। मुशायरे का संचालन कुमार विश्वास कर रहे थे।पर लोगों की दिल को छूने वाले शायर राहत इंदौरी ही थे।शायद कोरोना बीमारी ने दुनिया में जो कोहराम मचाया था, उसने मोहब्बत के इस शायर का दिल तोड़ दिया था और दुनिया को राहत मिलती न देख आख़िर राहत ने रुख़सत लेने की भनक भी किसी को नहीं लगने दी।

देश में फैले नफ़रत के ज़हर ने राहत इन्दौरी को भी दाग़दार बनाने की कोशिश की थी।राहत इंदौरी ने अपनी बेचैनी को मंच से साझा किया था कि केरल में एक जगह है भटकल, वहां के एक जनाब तकरीर कर रहे थे। उस वीडियो में मेरा भी जिक्र था कि उर्दू का एक कवि है राहत इंदौरी, वह जेहादी है। मैं हैरत में पड़ गया कि 70 साल हो गए इस वतन में रहते हुए और मुझे पता ही नहीं चला कि मैं जेहादी हूं। मैंने मेरे दोस्त, रिश्तेदारों, पत्नी और बच्चों से पूछा कि क्या मैं जेहादी हूं? रात भर सो नहीं पाया था, बैचनी रही और करवटें बदलता रहा। सुबह फजर की अजान हुई तो मैंने अल्लाह की तरफ लौ लगाई। ऐसा लगा कि एक रोशनी उतर रही है और मुझसे कह रही है कि ‘राहत, तुम अलग जरूर हो, लेकिन जेहादी नहीं।’ देश के ऊर्दू अदब के नामी शायर डॉ. राहत इंदौरी ने ग्वालियर में अपना यह दर्द बयां किया था।
इस किस्से को बताते हुए उन्होंने कहा कि घटना के बाद मैंने दो लाइनें लिखी थीं कि
‘मैं जब मर जाऊं तो मेरी अलग पहचान लिख देना, लहू से मेरी पेशानी पर हिंदुस्तान लिख देना।’

उन्होंने मंच से ऐलान किया था कि मैं जितना कट्टर मुसलमान हूं, उससे ज्यादा कट्टर हिंदुस्तानी।

उनका अंतिम ट्वीट था कि कोविड के शुरुआती लक्षण दिखने पर कल मेरा कोरोना टेस्ट किया गया, जिसकी रिपोर्ट पॉज़िटिव आयी…….
ऑरबिंदो हॉस्पिटल में एडमिट हूँ …..दुआ कीजिए जल्द से जल्द इस बीमारी को हरा दूँ ….
एक और इल्तेजा है, मुझे या घर के दूसरे लोगों को फ़ोन ना करें, मेरी खैरियत ट्विटर और फ़ेसबुक पर आपको मिलती रहेगी।

उन्होंने मौहब्बत के शायर की तरह ही ज़िंदगी को हराकर मौत को गले लगा लिया है। दुनिया में देश का नाम रोशन करने वाले मशहूर शायर राहत इन्दौरी की ख़बर अब फ़ेसबुक और ट्विटर का हिस्सा ही बन गई है। डॉक्टर इस दुनिया के नादान बदज़ुबान लोगों की गलतियों को दिल से माफ़ कर देना।आप कट्टर हिंदुस्तानी पैदा हुए थे, कट्टर हिंदुस्तानी रहे और कट्टर हिन्दुस्तानी के रूप में ही याद किए जाएंगे।

अंत में भावभीनी श्रद्धांजलि-

जीवन से रुखसत तब ले ली जब राहत बाँट न पाए

कौशल किशोर चतुर्वेदी

दुनिया से चैन छीना है मुझसे भी राहत को छीना
मुक़द्दर हमारा ख़राब था जो संभाल के रख नहीं पाए

अस्पताल का जायज़ा लेने वो अभी तो घर से निकले थे
दिलों का दर्द जो जाना वो फिर सांसें ले नहीं पाए

परेशां करना न मेरे दोस्त मेरे परिवार वालों को
दुआ तुम रब से यह करना मेरा मिज़ाज ख़ुश हो जाए

इत्तिला करके बस इतना वो दुनिया से कूच कर गए
कट्टर हिंदुस्तानी हूँ मैं दोस्त समझ तुम मुझको न पाए

राहत बाँटते रहे सब में जब भी मौक़ा मिला उनको
जीवन से रुखसत तब ले ली जब राहत बाँट न पाए

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