Krashi billo ki aaad may bole shivraj…chauthi paari may tufaani hoga raajkaaj…article by Kaushal kishore chaturvediji

कृषि बिलों की आड़ में बोले शिवराज…चौथी पारी में तूफ़ानी होगा राजकाज …

कौशल किशोर चतुर्वेदी

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की चौथी पारी अब कठोर फैसलों से सराबोर रहेगी। मंगलवार को भेल दशहरा मैदान में मुख्यमंत्री शिवराज ने यह संकेत दे दिए। वे अलग ही अंदाज़ में नज़र आए और उन्होंने साफ़ कर दिया कि यह पारी तूफ़ानी होने वाली है।चौथी पारी में पिछली तीन पारियों से आगे बढ़कर पिच पर 20-20 क्रिकेट मैच के फ़ॉर्म में धुआँधार बल्लेबाज़ी का उन्होंने आगाज़ कर दिया है।और अब मैदान में न तो उनके क़दम ही थमने वाले हैं और रन बनाने में भी नए-नए रिकॉर्ड बनाने का उनका पूरा इरादा है। तो उन्होंने यह भी साफ़ कर दिया कि विकेट लेने में भी वह पीछे नहीं हटेंगे, चाहे प्रदेश में माफ़ियाओं की बात हो या फिर गुंडों का सफ़ाया करने का टारगेट हो। तो कहीं न कहीं इस मामले में अपरोक्ष रूप से उन्होंने अपने राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों को भी आगाह कर ही दिया है कि… चौथी पारी है समझने वाले समझ लें कि शिवराज जहाँ सज्जनों के लिए फूल से भी कोमल हैं तो दुर्जनों के लिए वज्र से भी कठोर हैं।अब शिवराज, भाजपा सरकार और संगठन के लिए दुर्जनों में कौन-कौन आता है… यह समझने वाले समझें और हो सके तो सज्जन बनने की दिशा में कदम बढ़ाने का मन भी बना लें वरना खैर नहीं है यह शिवराज ने जता दिया है।तो उन्होंने यह भी जता दिया कि विष्णु उनके लिए और भाजपा के लिए लकी है और चौथी पारी में विष्णु संग शिवराज राजकाज के मामले में सख़्त रहेंगे और कोई समझौता करने के मूड में नहीं है।यानी विष्णु जहाँ भाजपा संगठन के फलने फूलने के साथ साथ सरकार को संबल प्रदान करेंगे तो शिव अपने कोमल और कठोर रूप में सरकार के फ़ैसलों से प्रदेश को संजीवनी देंगे।

जवाब नहीं शिवराज का …
एक कुशल वक्ता के रूप में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का कोई सानी नहीं है। कृषि बिलों पर किसान कार्यकर्ताओं को समझाइश देते हुए उन्होंने साफ़ कर दिया और किसानों के हाथ उठवा कर यह वादा भी ले लिया कि वह सब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और तीनों कृषि बिलों के साथ हैं।और शिवराज जैसे ट्रेनर से ट्रेन्ड होकर किसान कार्यकर्ता किसानों को कृषि बिलों की जो घुट्टी पिलाएंगे, उसके बाद देश के दिल मध्य प्रदेश के किसानों के दिल से यही आवाज़ निकलेगी की इन तीन कृषि बिलों के बिना किसान का उद्धार होने वाला नहीं है।समझाने का तरीक़ा भी अनूठा कि अंगूठा छाप किसान भी मुँह जुबानी बोलने लगे कि कृषि बिलों में क्या- क्या है? पहला कृषि बिल कि किसान सिर्फ़ मंडियों में अपनी उपज बेचने को मजबूर न रहे और आढ़तियों की मनमानी का ग़ुलाम ना बना रहे। इसके लिए वह अपनी उपज जिसको चाहे जहाँ चाहे अपनी पसंद से दे सके और ज़्यादा से ज़्यादा मूल्य में बेचने की आज़ादी पा सकें। फिर शिवराज का पूछने का अंदाज़ कि इसमें किसानों का हित है या नहीं तो भीड़ में से आवाज़ आनी शुरू होती है कि किसानों का हित है। और मंच से शिवराज चिल्लाते हैं कि मीडिया वालों आज इन किसानों की तरफ़ कैमरा मोड़ दो। मुझे तो रोज़ रोज़ दिखाते हो आज इन्हें ही दिखा दो। फिर दूसरा कृषि बिल कॉन्ट्रैक्ट फ़ार्मिंग…बताओ इसमें क्या बुराई है कि कोई खेत में फ़सल बोने के समय ही किसान से समझौता कर ले कि फ़सल को 5000 रुपये प्रति क्विंटल ख़रीदेगा और किसान राज़ी है कि उसे मुनाफ़ा हो रहा है तो वह समझौता करने के लिए क्यों स्वतंत्र न हो? और कोई अगर बाद में ख़रीदने से मुकर गया तो उदाहरण भी है पिपरिया एसडीएम का, उन्होंने समझौता करने वाले को सम्मन जारी कर फ़सल ख़रीदने पर मजबूर कर दिया। अब बताओ किसान भाईयों इसमें क्या बुराई है? क्या यह किसान के हित में नहीं है? किसान भाईयों हाथ उठाकर बताओ … फिर भीड़ से आवाज़ें आती हैं और शिवराज बोल पड़ते हैं कि अरे यार मीडिया वालों कैमरे किसानों की तरफ़ मोड़ दो आज। फिर तीसरा बिल कि ख़रीदने पर पाबंदी ख़त्म क्यों न हो? स्टॉक लिमिट ख़त्म करने के पीछे मोदी की यह सोच है कि ज़्यादा से ज़्यादा क़ीमत में किसान की अधिक से अधिक फ़सल बिक सके…यानी कि फ़सल ख़रीदने की पाबंदी से आज़ादी। फिर किसानों की भीड़ से आह्वान और फिर मीडिया से अपील कि मोदी और कृषि बिलों का समर्थन करने वाले किसानों को दिखाएं। और मुट्ठी बांधकर भारत माता की जय के साथ ही शिवराज सिंह चौहान किसान कार्यकर्ताओं को और किसानों को पूरी तरह से ट्रेंड करने में सफल हो जाते हैं।शिवराज का भाषण सुनकर मंच पर बैठे प्रदेश भाजपा अध्यक्ष विष्णु दत्त शर्मा मंद-मंद मुस्कराते हुए गौरवान्वित दिख रहे हैं तो मंचासीन सभी मंत्री, पूर्व मंत्री, विधायक, सांसद, पदाधिकारी, शिवराज की समझाने की इस अदा के न केवल क़ायल दिखाई देते हैं बल्कि उनके सामने पूरी तरह से नत मस्तक दिखाई देते हैं। कृषि बिलों को समझाने के साथ ही मुख्यमंत्री के रूप में शिवराज यह भी भरोसा दिलाते हैं कि प्रदेश की एक भी मंडी बंद नहीं होगी और किसान जहाँ चाहेगा वहाँ अपनी फ़सल बेचेगा…चाहे तो मंडी के अंदर या मंडी के बाहर।

तुकबंदी भी…हदबंदी भी-
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने जहाँ तुकबंदी के ज़रिए भी ख़ूब समझाइश दी तो विरोधियों को हद में रहने की चेतावनी भी देने से नहीं चूके। शिवराज कहते हैं कि भारतीय जनता पार्टी की सरकार कैसी है अगर तुकबंदी में कहूं तो *हर बच्चे की पढ़ाई, हर बीमार को दवाई, हर खेत को सिंचाई, हर गरीब मजदूर की भलाई, हर युवा के हाथ में कमाई, हर नारी नारायणी कहलाई, गांव शहर घर घर में सफाई, ना कोई ढोंग ना कोई ढिलाई और गुंडों की ठुकाई।*
विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए साफ़ कर दिया कि मैदान में मोदी जी का मुकाबला नहीं हो सकता इसलिए गाली दे रहे हो। जहां देखो वहां हारते जा रहे हो, मैदान साफ होता जा रहा है। किसानों के नाम पर मोदी को गाली दे रहे हो यानी कि विपक्ष अपनी हद में रहे अब वह किसी क़ाबिल नहीं रहा।मैदान में वह मोदी का मुक़ाबला नहीं कर सकता तो मैदान-मंच पर शिवराज का मुक़ाबला करने की हिम्मत भी विपक्ष में नहीं है।
मोदी को समर्थन देने के लिए मध्य प्रदेश सरकार और भाजपा संगठन का यह मेगा शो जहाँ निश्चित तौर पर प्रधानमंत्री के मन में शिव-विष्णु के प्रति स्नेह-प्रेम बढ़ाएगा तो निश्चित तौर से शिवराज की चौथी पारी पर कहीं न कहीं मोदी की निगाह भी रहेगी। उत्तर प्रदेश में अगर मुख्यमंत्री योगी 20-20 की तूफ़ानी पारी खेल सकते हैं तो मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री शिवराज की चौथी पारी भी दूसरे मुख्यमंत्रियों पर भारी पढ़ने वाली है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के हाव-भाव शायद यही संदेश दे रहे हैं।

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