Kaun gaddar kaun wafadar….tay karega matdata ka pyaar

‘कौन ग़द्दार’-कौन ‘वफादार’ … तय करेगा मतदाता का प्यार …

कौशल किशोर चतुर्वेदी

अब यह तय हो गया है कि मध्य प्रदेश में विधानसभा की 27 सीटों पर होने जा रहा उपचुनाव में ‘ग़द्दार’ शब्द का दबंगई से दोनों ही प्रमुख राजनीतिक दलों कांग्रेस-भाजपा की तरफ़ से प्रयोग होने वाला है। ज्योतिरादित्य सिंधिया और उनके साथ गए 22 पूर्व विधायकों को लेकर कांग्रेस नेता इस शब्द का प्रयोग पहले से ही कर रहे हैं लेकिन अब ख़ुद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ पर ‘ग़द्दार’ शब्द चस्पा कर यह साफ़ कर दिया है कि अब जनता ही तय करे कि ‘असल में ग़द्दार’ कौन है ? अब यह मुहर मतदाता ही लगाएगा कि किसके प्रति उसका भाव ‘ग़द्दार’ का है या किसको वह प्रदेश का ‘वफ़ादार’ मानता है। हो सकता है कि उपचुनाव होने तक सीटों की संख्या कुछ और बढ़ जाए, ऐसे में प्रदेश में सरकार को बनाए रखने या बदलने में मतदाता की भूमिका और भी ज़्यादा बढ़ जाएगी।
ज्योतिरादित्य सिंधिया ने हाल ही में पोहरी,करैरा और डबरा में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और केन्द्रीय मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर की मौजूदगी में कहा कि मेरी दादी राजमाता जी, पिताजी और वर्तमान पीढ़ी का लक्ष्य राजनीति नहीं बल्कि जनसेवा रहा है। कांग्रेस के कार्यकर्ता के रूप में मैंने 20 साल की उम्र में झंडा उठाया था। बहुत आशा और अभिलाषा थी। मकसद एक ही था जनता के विकास और प्रगति का, जो मेरा धर्म बनता था। कांग्रेस कहती है, हमारे विधायक गद्दार थे, लेकिन गद्दार कमलनाथ हैं, जिन्होंने मुख्यमंत्री पद के साथ ऐसा सलूक किया। उन्होंने कहा कि ऐसे गद्दार को सड़क पर लाना सिंधिया परिवार का दायित्व बनता है। सिंधिया ने कहा कि पृथ्वी पर दो भगवान होते हैं। एक वो जो सारी दुनिया का पालन करता है और दूसरा भगवान मतदाता होता है, जो इंसान को नेता बनाता है। उन्होंने कहा कि अगर आप सबका आशीर्वाद रहेगा, तो निश्चित रूप से आने वाले चुनाव में बादल छटेगा, सूरज निकलेगा और कमल खिलेगा।

दूसरी तरफ़ कांग्रेस मानती है कि मध्यप्रदेश में चुनाव तो 2023 में ही होंगे, अभी तो केवल “ग़द्दार ट्रीटमेंट कार्यक्रम” होना है।मध्यप्रदेश कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष जीतू पटवारी ने हाल ही में प्रतिक्रिया दी थी कि कल तक जो कहते थे कि हमने जनसेवा के लिए गद्दारी की, वो आज अपने कर्यकर्ताओं को मौज-मस्ती और मलाई के लिए गद्दारी की बात कर रहे हैं।
तो पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से भी ट्वीट के ज़रिए सिंधिया पर निशाना साधते हुए पूछ चुके हैं कि शिवराज जी , अपने ईमान का सौदा करना , जनादेश को धोखा देना , पीठ में छुरा घोंपना , जनता व लाखों कांग्रेस कार्यकर्ताओं के विश्वास को तोड़ना , वह भी सिर्फ़ सत्ता की चाह के लिये , पद प्राप्ति के लिये , चंद स्वार्थपूर्ति के लिये ,
वो भी उस पार्टी के साथ जिसने मान – सम्मान , पद सब कुछ दिया , बताये क्या कहलाता है ?
दल छोड़ना व जनता के विश्वास का सौदा करने में बहुत अंतर है।
राजनीतिक क्षेत्र में आज भी कई लोग सिर्फ़ अपने मूल्यों , सिद्धांतों व आदर्शों के लिये जाने जाते हैं और कईयों का इतिहास ही धोखा , ग़द्दारी से जुड़ा हुआ है।
कांग्रेस भी यह बार-बार उम्मीद जता चुकी है कि प्रदेश की जनता लोकतंत्र के हत्यारों को माफ़ नहीं करेगी और उपचुनावों के बाद प्रदेश में एक बार फिर कांग्रेस की सरकार बनेगी।
सिंधिया ने साफ़ कर दिया है कि बागडोर भगवान के रूप में मतदाता के हाथ में है।और कांग्रेस का भरोसा भी मतदाताओं पर है।मध्य प्रदेश में कमल खिला रहे या कमलनाथ की वापसी हो, यह मतदाता रूपी भगवान को ही तय करना है।और परिणाम ही तय करेंगे कि यह भगवान किस को ग़द्दार मानकर हाशिये पर जाने को मजबूर करता है।और किस पर प्यार लुटाकर ‘वफादार’ का सर्टिफ़िकेट चस्पा करता है। हालाँकि जनता यह भी जानती है कि ऐसे शब्दों का अस्तित्व आरोप- प्रत्यारोप के रूप में महज चुनावों तक ही है।उसके बाद लोकतंत्र के यह परिपक्व नुमाइंदे शिष्टाचार की भाषा बोलेंगे और एक दूसरे के प्रति आदर जताएंगे, गले लगाएंगे और एक-दूसरे के सुख-दुख में साथ खड़े होने की औपचारिकता भी बख़ूबी निभाएंगे।जनता फिर अपने दुखों से जूझती हुई भगवान का दर्जा पाने के लिए अगले चुनाव का इंतज़ार करेगी। यह चुनाव ग़द्दार बनाम वफ़ादार में बँटा है तो अगला चुनाव फिर नये जुमले लेकर आएगा और मतदाताओं को नए सिरे से छकाएगा।मतदाताओं के सामने फिर चुनौती होगी कि किसके प्रति लगाव दिखाए और किसके प्रति दुराव।

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