janta jeeti loktantra jeeta…jeeta madhya pradesh

जनता जीती, लोकतंत्र जीता…जीता मध्यप्रदेश…

कौशल किशोर चतुर्वेदी

मंगलवार को हुए मतदान और मंगलवार को हुई मतगणना के बाद मध्यप्रदेश की राजनैतिक तस्वीर साफ़ हो गई है। मध्य प्रदेश की राजनीति को स्थायित्व की संजीवनी मिल गई है। अब यह तय हो गया है कि प्रदेश को आगामी 37 महीने के लिए एक स्थाई सरकार मिल चुकी है। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह के नेतृत्व में 15 महीने के ब्रेक के बाद बनी भाजपा सरकार अब अपना सफ़र जारी रखेगी। चाहे आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी रहे।हार-जीत के विश्लेषण में आत्म संतुष्टि के कोने तलाशे जाते रहें लेकिन समय ने अपना फ़ैसला सुना दिया है और प्रदेश की 7.5 करोड़ जनता को दीपावली का अमूल्य उपहार स्थायी सरकार के रूप में दे दिया है। मध्य प्रदेश की जनता जीत गई है, लोकतंत्र जीत गया है और अंततः मध्य प्रदेश जीत गया है। आगामी तीन साल के लिए अब जनता की बागडोर भाजपा सरकार के हाथों में सुरक्षित मानी जा सकती है। मंगलवार के दिन चाहे किसी का भी मंगल हुआ हो या किसी का अमंगल हुआ हो लेकिन अब चैन की साँस ली जा सकती है कि मध्य प्रदेश का मंगल ज़रूर हुआ है।यह तय हो चुका है की ख़रीद-फ़रोख्त,टिकाऊ-बिकाऊ, ग़द्दार- वफ़ादार और लोकतंत्र की हत्या- लोकतंत्र की सुरक्षा जैसे बेचैन करने वाले शब्दों का दोहराव होने और ज़ुबानों पर आने की गुंजाइश अब पूरी तरह खत्म हो चुकी है। प्रदेश की जनता अब चैन की साँस ले सकती है और प्रदेश के विकास की राह पर आगे बढ़ने का सपना देख सकती है।यह सुकून की बात है कि केन्द्र में भी भाजपा की सरकार है और मध्य प्रदेश में भी भाजपा की सरकार है, ऐसे में अब केंद्र और प्रदेश के बीच लोकतांत्रिक टकराव और आर्थिक अहित होने की आशंकाओं को भी निराधार माना जा सकता है। खुशियों की इस बेला में यह उम्मीद भी की जा सकती है कि कोरोना महामारी से मध्य प्रदेश, देश और दुनिया को जल्दी निजात मिलेगी और चारों तरफ़ मंगल ही मंगल होगा। 2020 के साल में 2021,2022 और 2023 तक आत्मविश्वास के साथ अब भाजपा की खरी, परखी, जाँची भाजपा-शिवराज सरकार के साथ कदम से कदम मिलाकर इस उम्मीद के साथ मध्यप्रदेश आगे बढ़ेगा कि सरकार हर कसौटी पर सच्ची साबित होगी।

  1. इन चुनाव परिणामों ने यह भी साबित कर दिया है कैडर-कार्यकर्ता आधारित भारतीय जनता पार्टी के संगठन का मुक़ाबला करना कांग्रेस या किसी भी दूसरे दल के लिए बहुत कठिन चुनौती है। संगठन के मुखिया के नाते विष्णु दत्त शर्मा ने भी अपनी सांगठनिक क्षमता का लोहा इन उपचुनावों के ज़रिए भी मनवाया है। वैसे मध्य प्रदेश में भाजपा के लिए लकी सिंबल ही साबित हुए हैं।उनके अध्यक्ष बनते ही मध्य प्रदेश में भाजपा की सरकार भी बनी। और अब उपचुनावों में भी शानदार जीत हासिल हुई है। जननायक के रूप में स्थापित शिवराज सिंह चौहान अब महानायक बनकर उभरे हैं। ज्योतिरादित्य सिंधिया भी यह साबित करने में सफल रहे हैं कि उनका फ़ैसला सही था और कांग्रेस की सरकार गिराकर व भाजपा को गले लगाकर उन्होंने जनता के मन की बात पर ही मुहर लगाई थी। अब उनके फ़ैसले पर जनता भी मुहर लगा चुकी है। हालाँकि अपने कुछ प्रत्याशियों के हारने की कसक उन्हें टीस ज़रूर पहुंचाएगी लेकिन शिवराज-महाराज की जोड़ी मिलकर प्रदेश की जनता के हित में एक और एक मिलकर 11 का दम भरकर काम करके दिखा सकेगी, यह भरोसा भी जनता ने उन पर जता दिया है। मंगलवार से न्याय की उम्मीद लगाए बैठे और फिर से सरकार में वापसी का दावा करने वाले हनुमान भक्त कमलनाथ को यह दिन भले ही फिलहाल अमंगल नज़र आ रहा हो लेकिन हो सकता है कि इस अमंगल में ही उनका और प्रदेश की जनता का मंगल छिपा हो।क़िस्मत ने कमलनाथ को मौक़ा दिया था पर उसको भुनाने में वह सफल नहीं हो सके और अब मध्यप्रदेश और प्रदेश की साढ़े सात करोड़ जनता फिर से अस्थायित्व के दौर से गुज़रने की आपदा का दंश नहीं झेल सकती थी। शायद रामभक्त हनुमान ने अपने एक भक्त को निराश कर यह न्याय करना ही उचित समझा हो।
    खैर बुधवार को बुद्धि के देवता गणेश के दिन हम सूर्योदय के साथ यह अपेक्षा कर सकते हैं कि नई ऊर्जा के साथ सरकार प्रदेश के किसानों, नौजवानों, महिलाओं, गरीबों, मध्यमवर्गीय और उच्च वर्ग सभी के हित में काम कर लगातार सरकार में बने रहने का हक हासिल करेगी। और जनता की जीत, लोकतंत्र की जीत और मध्यप्रदेश की जीत सार्थक होगी।

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