. If he had not been with him, The Sindhiya would not have got the BJP government … Kaushal Kishore Chaturvedi

उपेक्षा का शिकार विंध्य … साथ न देता तो सिंधिया भी न बनवा पाते भाजपा सरकार …

कौशल किशोर चतुर्वेदी

मध्य प्रदेश में बहुप्रतीक्षित मंत्रिमंडल विस्तार आख़िर हो गया। दो जुलाई के इस गुरुवार ने उन पूर्व विधायकों पर ख़ुशियों की बरसात कर दी जिन्होंने कांग्रेस की सरकार में मंत्री बनने का सोचा तो था लेकिन यह भी समझ लिया था कि उनकी ये मुराद कभी पूरी नहीं होगी। और इन महत्वाकांक्षी पूर्व विधायकों के निराशा भरे वही 15 महीने आख़िरकार 15 साल बाद बनी कांग्रेस सरकार पर भारी पड़ गए।कांग्रेस सरकार में मंत्री पद से नवाजे गए 6 सिंधिया समर्थक विधायक भी इसमें शामिल थे जिनकी सत्ता में सीधी भागीदारी थी तो पर वह भी महाराज की कृपा का ही फल था। तो ऐसे में कांग्रेस सत्ता का त्रिकोणीय महल 20 मार्च को भरभराकर गिर गया जब महाराज ने सम्मान के नाम पर कांग्रेस सरकार को कहीं का न छोड़ा।महाराज के सम्मान के लिए छह मंत्री सहित 19 विधायकों ने तीन अन्य कांग्रेस विधायकों के साथ कोरे कागज़ पर दस्तख़त कर नाथ को छोड़ कमल का दामन थामा और इन 22 विधायकों में से अब चौदह के चेहरे मंत्री बनकर महाराज की तरफ़ देखते हुए गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं।

पर इन 14 चेहरों के गौरव ने भी भाजपा के उन 14 चेहरों का गौरव छीन लिया है जिन्होंने अपना पूरा जीवन भाजपा को समर्पित करने के बाद यह सोचा था कि अब की बार तो पार्टी और सरकार उनके सम्मान का ख्याल रखेगी। पर यह सम्मान शायद वह अब नहीं पा पाएँगे। समर्पित चेहरों के साथ ही इस मंत्रिमंडल विस्तार में उपेक्षा का शिकार वह क्षेत्र भी हुए हैं जहाँ की जनता ने भाजपा को झोली भर-भरकर वोट दिया था। हम बात कर रहे हैं मंत्रिमंडल विस्तार में सबसे ज़्यादा उपेक्षित हुए विंध्य क्षेत्र की। अमरपाटन के रामखेलावन पटेल को इस मंत्रिमंडल विस्तार में इकलौता मंत्री बनाया गया है।इससे पहले पिछले पाँच मंत्रियों में मानपुर की मीना सिंह को भी मंत्री पद से नवाज़ा गया था। यानि कि शिवराज सरकार के तेतीस मंत्रियों में से विंध्य के हिस्से में केवल दो मंत्री आए। एक आदिवासी महिला मंत्री बनीं तो दूसरे पिछड़ा वर्ग के पुरुष रामखेलावन पटेल।बाक़ी सभी वर्ग और समुदाय के लोग और उनके द्वारा चुने गए अन्य वर्गों के जनप्रतिनिधि अब अमृत मंथन में निकले विष को पीने को मजबूर हैं।भले ही मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान कहें कि विष तो शिव पिएँगे और अमृत सबके हिस्से में आएगा लेकिन देखा जाए तो मंत्रिमंडल विस्तार का ज़हर सबसे ज़्यादा विंध्य क्षेत्र के हिस्से में ही आया है।
आंकड़ों की बात करें तो विंध्य क्षेत्र के सतना रीवा सीधी सिंगरौली शहडोल अनूपपुर और उमरिया ज़िले कि 30 विधानसभा सीटों में से 2018 के विधानसभा चुनावों में भाजपा को 24 मिली थी यानि कि 80 फ़ीसदी सीटों पर भाजपा का क़ब्ज़ा हुआ था। पूरे प्रदेश में भाजपा को 109 सीटें मिली थीं इनमें से 24 महत्वपूर्ण सीटें विंध्य ने दी थी। ऐसे में विंध्य क्षेत्र ने महत्वपूर्ण 22 फ़ीसदी हिस्सेदारी भारतीय जनता पार्टी के खाते में दर्ज की थी। और मंत्रिमंडल में विंध्य क्षेत्र की हिस्सेदारी की बात की जाए तो महज़ छह फ़ीसदी ही उसके खाते में आया है। ऐसे में क्या विंध्य क्षेत्र का दर्द क्या उसे कराहने पर मजबूर नहीं कर रहा है ?

शिवराज के मंत्रिमंडल में विंध्य से अगर तीसरा चेहरा माना जाए तो बिसाहूलाल सिंह का है जिनका पूरा जीवन कांग्रेस में बीता है लेकिन भाजपा ने उन्हें बिना विधायकी के भी मंत्री बनने का गौरव भेंट किया है।इन्हें मिलाकर विंध्य क्षेत्र कि मंत्रिमंडल में हिस्सेदारी नौ फ़ीसदी हो जाती है। इसमें प्रतिनिधित्व मिला है आदिवासी और पिछड़ा वर्ग को। गौरव भेंट करने के बदले में जिन विधायकों को और अन्य वर्गों को मंत्रिमंडल में अपनी हिस्सेदारी से वंचित रहना पड़ा उनमें सबसे पहला नाम आता है राजेन्द्र शुक्ला का।तो जुगल किशोर बागरी, नागेन्द्र सिंह, गिरीश गौतम, केदारनाथ शुक्ल, रामलल्लू वैश्य जैसे दूसरे नामों का दावा भी कमज़ोर नहीं माना जा सकता। इनमें से कुछ चेहरे भाजपा सरकार में पहले भी मंत्री रह चुके हैं तो बाक़ी चेहरे यह गौरव हासिल करने के लिए पूरा जीवन गुज़ार चुके हैं। पर अब यह भी सोच रहे होंगे कि जीवन गुज़र गया और अब उन्हें मंत्रीपद कभी भी हासिल नहीं होगा।

विंध्य क्षेत्र की बात इसलिए भी क़ाबिले ग़ौर है क्योंकि अगर यहाँ की 24 सीटें भाजपा के खाते में नहीं आतीं तो शायद आज सिंधिया भी समर्थन करते तब भी कांग्रेस सरकार को गिरा पाना संभव न होता। ग्वालियर-चम्बल , महाकोशल और भोपाल संभाग की तरह विंध्य क्षेत्र में भी भाजपा यदि कांग्रेस से पिछड़ी होती तो 15 महीने बाद भाजपा को सरकार बनाने का तोहफ़ा दे पाना सिंधिया के बस में भी नहीं होता। ऐसे में अब मंत्रिमंडल की पूरी तस्वीर देखने के बाद विंध्य क्षेत्र कहीं के बौने आदमी की तरह ख़ुद पर तरस खा रहा है। और अमृत मंथन का विष भले ही शिवराज ने पिया हो लेकिन नीला कंठ लिए विंध्य क्षेत्र के विधायक विधानसभा में भी दिखेंगे और अपने अपने क्षेत्र में भी।
हालाँकि मंत्रिमंडल विस्तार से यह साफ़ है कि भारी बरसात में भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने उप चुनावों की दृष्टि से चुनावी बिसात बिछा दी है। और गुलाबी ठंड आते आते अगर उपचुनावों के बाद स्थितियां अनुकूल रहीं तो सभी क्षेत्रों और सभी वर्गों को उनका गौरव और सम्मान लौटाने का ब्लू प्रिंट भाजपा ने तैयार कर रखा होगा।ऐसे में फ़िलहाल उम्मीद यही करना चाहिए कि विंध्य के चेहरे पर ख़ुशी ज़रूर लौटेगी।

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