Gavo ka vikas, rach raha itihaas….

गाँवों का विकास, रच रहा इतिहास*

कौशल किशोर चतुर्वेदी

ग्रामीण विकास मंत्रालय की महत्वपूर्ण योजनाएं एवं इस वर्ष की उपलब्धियाँ गाँवों के विकास के मामले में इतिहास रच रही हैं।ग्रामीण विकास मंत्रालय इस वर्ष ग्रामीण भारत के विकास एवं ग्रामीणों के कल्याण पर लगभग 2 लाख करोड़ रुपए की धनराशि व्यय करेगा। इसमें से अब तक 1 लाख 5 हजार करोड़ रुपए की राशि राज्यों को जारी कर चुका है। ग्रामीण विकास एवं पंचायतीराज मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर का संकल्प है कि हर गरीब हाथ को रोज़गार मिले, किसानों की आय दोगुनी हो, हर पात्र हितग्राही को आवास मिले और प्रधानमंत्री की मंशा के मुताबिक़ गाँव आत्मनिर्भर बन सकें। विभागीय उपलब्धियाँ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इच्छा के अनुरूप केंद्रीय ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर के प्रयासों के फलीभूत होने की गवाही दे रही हैं।

*25.75 करोड़ श्रम दिवस का रोजगार सृजन-*
विभाग ने गरीब कल्याण रोजगार अभियान के तहत
25 करोड़ 75 लाख 68 हज़ार 175 श्रम दिवस का रोजगार सृजन कर कुल 21549.32 करोड़ राशि का व्यय किया है। यह कार्यक्रम 20 जून 2020 से देश के 6 राज्यों के 116 जिलों में संचालित किया जा रहा है।

मनरेगा में बजट भरपूर, मज़दूरी बढ़ायी –
मनरेगा के तहत वर्तमान वित्तीय वर्ष में 192.97 करोड़ श्रमदिवस के रोजगार का सृजन कर 9.93 करोड़ लोगों को जॉब ऑफर दिया गया। राज्यों को 58,960.52 करोड़ राशि जारी की गई है। 1 अप्रैल 2020 से मनरेगा की मजदूरी दर औसतन 182 रु. से बढ़ाकर 202 रुपए कर दी गई है। मनरेगा के तहत वर्ष 2020-21 के लिए 40,000 करोड़ रुपए का अतिरिक्त प्रावधान किया गया है। मनरेगा आवंटन 61650 करोड़ रुपए से बढ़ाकर 101500 करोड़ रुपए कर दिया गया है।

26 हज़ार किमी सड़कें स्वीकृत-
प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना फेज़ -3 के तहत 82500 करोड़ रुपए की लागत से 125000 किलोमीटर सड़क निर्मित करने का लक्ष्य है। इस योजना के तहत देश में अब तक 26000 किलोमीटर सड़क निर्माण के कार्य स्वीकृत किये जा चुके हैं।

एक करोड़ से ज्यादा आवास पूर्ण –
प्रधानमंत्री आवास योजना ( ग्रामीण) के अंतर्गत कुल 2.95 करोड़ आवास निर्मित करने का लक्ष्य है। अब तक 2.21 करोड़ आवास राज्यों को आवंटित किये जा चुके हैं एवं लगभग 1 करोड़ से ज्यादा आवास पूर्ण किये जा चुके हैं। इस बाबत राज्यों के पास अब तक कुल 160555.29 करोड़ रुपए की धनराशि योजना के क्रियान्वयन के लिए उपलब्ध है। वर्ष 2022 तक सभी पात्र आवासहीनों को आवास उपलब्ध कराने का लक्ष्य है।

महिलाओं की चिंता –
कुल 20.65 करोड़ खाता धारकों को तीन माह के लिए 500 रुपए प्रतिमाह की अनुग्रह राशि खाते में अंतरित की गई। इस पर कुल 31000 करोड़ रुपए की धनराशि व्यय की गई।

वरिष्ठ नागरिकों, विधवाओं एवं दिव्यांगों के लिए सहायता-
2.82 करोड़ बुजुर्गों, विधवाओं एवं दिव्यांग श्रेणी के लोगों को 500 रु. की दो किश्तों में कुल 1000 रुपए की सहायता जारी की गई। इस पर कुल व्यय 2815 करोड़ रुपए किए गए।

उपलब्धियों का पर्याय बना पंचायती राज मंत्रालय-

पंचायती राज मंत्रालय की प्रमुख योजनाएँ के ज़रिए पंचायतों का कायाकल्प किया जा रहा है। गांवों में ब्रॉडबैंड,डिजिटाइजेशन, डिजिटल भुगतान न जैसे क्रांतिकारी क़दम इतिहास बना रहे हैं। पंचायती राज मंत्रालय की उपलब्धियां आधुनिक भारत के गाँवों की उजली तस्वीर पेश कर रही हैं।

– देश में स्थानीय शासन की व्यवस्था को सशक्त करने, गांव तक सुराज पहुंचाने और शासन व्यवस्था की शक्ति का विकेंद्रीकरण करने के उद्देश्य से पंचायती राज प्रणाली लागू की गई है। पंचायतों को अनिवार्य संवैधानिक दर्जा प्रदान करते हुए 1993 में 73 वें संविधान संशोधन के भाग IX में जोड़ा गया है। संविधान के अनुसार प्रति पांच वर्ष में चुनाव के माध्यम से पंचायतों के त्रि-स्तरीय पंचायती राज संस्थाओं (ग्राम, ब्लाक एवं जिला) का गठन किया जाता है। भारत में 2,69,347 ग्राम पंचायतें, 6717 ब्‍लॉक पंचायत तथा 654 जिला पंचायतें हैं ।
– पंचायतों के सभी तीन स्तरों पर सीटों का प्रत्यक्ष चुनाव और ब्लॉक और जिला पंचायतों के अध्यक्षों के लिए अप्रत्यक्ष चुनाव का प्रावधान है। अनुसूचित जाति- अनुसूचित जनजाति के लिए उनकी संबंधित आबादी के अनुपात में सीटों के आरक्षण का प्रावधान है तो वहीं महिलाओं के लिए अध्यक्ष पदों पर कम से कम एक तिहाई सीटों पर आरक्षण की व्यवस्था की गई है। संविधान के अनुच्छेद 243-घ में पंचायतों में महिलाओं के लिए आरक्षण बढ़ाने के लिए, आरक्षित वर्गों के लिए सीटों के चक्रण का प्रावधान भी किया गया है।
– पंद्रहवें वित्त आयोग ने अपनी अंतरिम रिपोर्ट में वित्त वर्ष 2020-21 के लिए, पंचायती राज के सभी स्तरों में ग्रामीण स्थानीय निकायों के लिए 60,750 करोड़ रूपए के अनुदान की सिफारिश की है, जिसमें 50 प्रतिशत (अबद्ध) और 50 प्रतिशत बद्ध (टाइड) हैं। इस बार 15वें वित्‍त आयोग ने पांचवीं और छठी अनुसूची क्षेत्रों की पारंपरिक निकायों को भी ग्रांट उपलब्‍ध कराये जाने की संस्‍तुति की है। अबद्ध बेसिक ग्रांट वेतन या अन्य स्थापना व्यय को छोड़कर, स्थान-विशिष्ट महसूस की गई जरूरतों के लिए ग्रामीण स्थानीय निकायों द्वारा उपयोग किया जा सकता है। बद्ध अनुदान का उपयोग खुले में शौच मुक्त (ओडीएफ) की स्थिति में स्वच्छता एवं रखरखाव, पीने के पानी की आपूर्ति, वर्षा जल संचयन और जल पुनर्चक्रण की बुनियादी सेवाओं के लिए ही किया जाना है।
– पंद्रहवें वित्त आयेाग की अंतरिम रिपोर्ट में यह सिफारिश की गई है कि केंद्र द्वारा जारी अनुदान को वर्तमान राज्य वित्त आयोग की स्वीकृत सिफारिशों के आधार पर ग्राम पंचायतों के लिए 70-85 प्रतिशत, मध्यवर्ती पंचायतों के लिए 10-25 प्रतिशत एवं जिला पंचायतों के लिए 5-15 उपयोग किया जाएगा, ताकि ज्यादा से ज्यादा धनराशी गांवों के विकास कार्यों में उपयोग हो सके।
– अबद्ध एवं बद्ध अनुदान की पहली किस्त के रूप में 30375 करोड़ रूपए 17 जून 2020 और 15 जुलाई, 2020 को सभी 28 राज्यों में ग्रामीण स्थानीय निकायों को जारी कर दिए गए है।
– मिशन अंत्‍योदय की रिपोर्ट के अनुसार लगभग 76 प्रतिशत ग्राम पंचायतों में आंतरिक सड़कों का निर्माण पूरा किया जा चुका है और स्‍ट्रीट लाईट आदि भी उपलब्‍ध कराई गई हैं ।
– अभी तक लगभग 1.40 लाख ग्राम पंचायत ब्राडबैंड कनेक्टिविटी से जुड़ चुके हैं । 60 हजार ग्राम पंचायतों में पंचायत भवनों में ही कॉमन सर्विस सेंटर की स्‍थापना की जा चुकी है। आप अवगत हैं कि विगत पांच वर्षों में विशेष रूप से ग्राम पंचायतों के कार्यों का डिजीटाइजेशन किया गया है । माननीय प्रधानमंत्री जी द्वारा ई-ग्राम स्‍वराज पोर्टल तथा एप्‍प का शुभारंभ दिनांक 24 अप्रैल, 2020 को किया गया ।
– अभी तक लगभग दो लाख 18 हजार ग्राम पंचायत प्रिया साफ्ट तथा 24 राज्यों में 1.57 लाख ग्राम पंचायत पीएफएमएस पेंमेंट पोर्टल पर पंजीकृत हो चुके हैं और 1.05 लाख पंचायतों ने लगभग 21,000 करोड़ रूपए का डिजीटल भुगतान किया है।
– राष्‍ट्रीय ग्राम स्‍वराज अभियान के अंतगत पूरे देश में अभी तक लगभग 72 लाख पंचायत प्रतिनिधियों, पंचायत पदाधिकारियों और ग्राम सभा सदस्‍यों ने प्रशिक्षण प्राप्‍त किया है।
– गाम पंचायत विकास योजना (जीपीडीपी)- लगभग 90 प्रतिशत ग्राम पंचायतों की वर्ष 2020-21 की ग्राम पंचायत विकास योजना ई-ग्राम स्‍वराज पोर्टल पर अपलोड करने की कार्यवाही पूर्ण की जा चुकी है।
– राष्ट्रीय पंचायत पुरस्कार पांच श्रेणियों में दिए जाते हैं, इसमें दीन दयाल उपाध्याय पंचायत सशक्तिकरण पुरस्कार (डीडीयूपीएसपी), नाना जी देशमुख राष्ट्रीय गौरव ग्राम सभा पुरस्कार (एनडीआरजीजीएसपी), बाल हितैषी ग्राम पंचायत पुरस्कार (सीएफजीपीए), ग्राम पंचायत विकास योजना पुरस्कार (जीपीडीपीए) और ई-पंचायत पुरस्कार को शामिल किया गया है।
– राष्ट्रीय पंचायत पुरस्कार 2020 (मूल्यांकन वर्ष 2018-19) की विभिन्न श्रेणियों मे देश भर की लगभग 55,000 पंचायतों ने भाग लिया जो पिछले वर्षों की तुलना में लगभग 1.5 गुना से अधिक भागीदारी है। इस वर्ष दीन दयाल उपाध्याय पंचायत सशक्तिकरण पुरस्कार 28 राज्यों-केंद्र शासित प्रदेशों में 213 पंचायतों (जिला, ब्लॉक,ग्राम) को दिया गया। नानाजी देशमुख राष्ट्रीय गौरव ग्राम सभा पुरस्कार 27 राज्यों-केंद्र शासित प्रदेशों में 27 ग्राम पंचायतों-ग्राम परिषदों को दिया गया। बाल हितैषी ग्राम पंचायत पुरस्कार 30 राज्यों-केंद्र शासित प्रदेशों में 30 ग्राम पंचायतों-ग्राम परिषदों को दिया गया। ग्राम पंचायत विकास योजना पुरस्कार 28 राज्यों-केंद्र शासित प्रदेशों में 28 ग्राम पंचायतों-ग्राम परिषदों को दिया गया। ई-पंचायत पुरस्कार 8 राज्यों को दिया गया।
– स्‍वामित्‍व योजना – माननीय प्रधानमंत्री जी द्वारा विगत 24 अप्रैल, 2020 को राष्‍ट्रीय पंचायती राज दिवस के अवसर पर प्रारंभ किए गए ऐतिहासिक स्‍वामित्‍व योजना के माध्‍यम से भी न केवल ग्राम पंचायतों के आबादी क्षेत्र के अंतर्गत व्‍यक्तिगत सम्‍पत्तियों का सीमांकन अद्यतन ड्रोन टैक्‍नालॉजी का उपयोग करते हुए अगले चार वर्ष में संभव हो सकेगा, वरन् यह ग्राम पंचायत द्वारा प्रभावी सम्‍पत्ति कर लागू करने की भी आधारशिला रखेगा । इस वित्‍तीय वर्ष में उत्‍तर प्रदेश, उत्‍तराखंड, मध्‍य प्रदेश, हरियाणा, महाराष्‍ट्र तथा कर्नाटक के एक लाख से ज्‍यादा ग्राम पंचायतों के ड्रोन सर्वे का कार्य पूरा किया जाएगा तथा सम्‍पत्ति परिपत्र भू-स्‍वामियों को सौंपा जाएगा।

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