Devlok may bhi coronavirus ki maar…Indra ne poocha ‘ SMS’ kya hai yaar…..

देवलोक में भी कोरोना की मार … इंद्र ने पूछा ‘एसएमएस’ क्या है यार …

कौशल किशोर चतुर्वेदी

मृत्युलोक में कोरोना से हाहाकार मचने के बाद अब इसका असर देवलोक तक पहुँचने लगा था।देवलोक पहुँची हज़ारों पुण्य आत्माएँ भी अतृप्त नज़र आ रहीं थीं। धर्मराज भी इन आत्माओं को देखकर विचलित थे। उन्होंने मृत्यु के बाद इन आत्माओं के स्वर्ग पहुँचने तक का पूरा हाल सेटेलाइट कैमरे से चेक किया तो वह ख़ुद भी बहुत बेचैन हो गए।देह धारण करने वाली इन आत्माओं के पुनीत कार्यों की वजह से यह स्वर्गलोक तो पहुँच गए थे लेकिन जिस तरह इनकी देह के साथ खिलवाड़ किया गया था, उसने आत्माओं को झकझोर कर रख दिया था।आत्माओं को कोरोना ने जकड़ रखा था। ऐसी एक आत्मा नहीं थी बल्कि हज़ारों आत्माएँ थीं जो देह को त्यागने के बाद भी कोरोना वायरस की मार से स्वर्ग में भी कराह रही थीं। ऐसी आत्माओं से धर्मराज को अपने में भी कोरोना के लक्षण दिखाई देने लगे।उनका मन बेचैन रहने लगा और साँस लेने में तक़लीफ होने लगी। कभी कभार गले में ख़रास की शिकायत होने लगी तो कभी थोड़ा चलने पर ही हांफने लगते और तेज तेज ख़ासी चलने लगती। धर्मराज की ऐसी हालत देवताओं से देखी नहीं गई।और अंततः फ़ैसला किया गया कि पत्रकारिता के जनक महर्षि नारद को मृत्युलोक भेज कर इस बीमारी और इसके इलाज का पूरा ब्योरा मंगाया जाए।
सभी देवता देव श्रेष्ठ ब्रह्माजी की शरण में पहुँच गए और धर्मराज की हालत बयां की और गुहार लगायी कि महर्षि नारद को मृत्युलोक भेजा जाए।ब्रह्माजी ने याद किया और नारायण नारायण बोलते हुए नारद जी प्रकट हुए। समस्याओं से घिरे देवताओं का वृतांत सुनकर ब्रह्माजी ने महर्षि से मृत्युलोक में जाकर कोरोना बीमारी की संपूर्ण जानकारी एकत्र करने का अनुरोध किया।देवता ब्रह्मा जी को नमन कर देवलोक की तरफ़ गए तो नारद जी मृत्युलोक की तरफ़ मुख़ातिब हुए।

मृत्युलोक में कोरोना महामारी का ब्योरा जुटाने के बाद नारद जी ने लॉकडाउन की विकट स्थिति में दम तोड़ते आर्थिक हालातों का जायज़ा भी लिया।तो कोरोना से देह त्यागने वाली आत्माओं के अतृप्त होने की वजहों का भी जायज़ा लिया। नारद जी थोड़ा और आगे बढ़े तो उन्हें आत्मनिर्भर भारत और वेबिनार जैसी नई शब्दावली भी सुनकर बड़ा आश्चर्य हुआ। ख़ास तौर से मध्यप्रदेश में वेबिनार के ज़रिए सुझाव मंगाकर तीन साल में प्रदेश को आत्मनिर्भर बनाने के दावों पर नारद ने दाँतों तले अपनी उँगलियाँ ही काट लीं। उन्होंने आश्चर्य व्यक्त किया कि जब देश की आबादी को आज़ादी के 72 साल बाद भुखमरी से निजात नहीं मिल पाई, अपराधों की खाई नहीं पट पाई, किसानों का खाद बीज का रोना जारी है, नौजवानों पर बेरोज़गारी भारी है तब अर्थव्यवस्था नाम की भैंस के पूरी तरह से दलदल में डूबने के बाद आख़िर तीन साल में आत्मनिर्भर होने की बात में कुछ सच्चाई है या फिर सब कुछ हवा हवाई है। ठीक वैसे ही जैसे विज्ञान चिकित्सा में सब कुछ हासिल करने का दावा होने के बाद भी बेचारा इंसान कोरोना वायरस के इलाज के अभाव में दम तोड़ रहा है और अतृप्त आत्माएँ स्वर्ग तक कोरोना का रोना रो रही हैं। ख़ैर नारद को पत्रकारिता का बड़ा अनुभव था और उन्होंने सैकड़ों घपले घोटाले उजागर किए थे इसलिए इन बातों पर ज़्यादा ग़ौर न करते हुए वह वापस देवलोक को गमन कर गए।
देवलोक पहुँचने पर इन्द्र सहित सभी देवताओं ने नारद जी के पास पहुँचकर कोरोना का पूरा वृतांत विस्तार से सुनाने का अनुरोध किया।नारद जी ने सभी देवताओं को वापस लौटा दिया और इन्द्र को अपने पास रोककर कोरोना महामारी के अनुरूप व्यवस्थाएं जुटाने का निर्देश दिया।उन्होंने कहा कि अब देवलोक में भी ‘एसएमएस’ का पालन करना ही पड़ेगा।देवराज इन्द्र ने बड़े कौतुहल से पूछा कि महर्षि यह ‘एसएमएस’ क्या बला है।जरा विस्तार से बताइए।तब नारद ने बताया कि ‘एसएमएस’ का मतलब है सोशल डिस्टेंसिंग, मास्क और सेनेटाइज़िंग। इसके अलावा भी क्वेरेंटाइन और आइसोलेशन जैसी शब्दावली भी समझना बहुत ज़रूरी है। सबसे पहले दो गज की दूरी सबसे ज़रूरी है। देवलोक में सभी देवता बिना मास्क के घर के बाहर न निकलें। इसके साथ ही समय समय पर साबुन से हाथ धोएँ और बाहर निकलें तो सेनेटाइजर का इस्तेमाल ज़रूर करें।यदि किसी में धर्मराज की तरह कोरोना के कोई लक्षण दिखाई दें तो उसे अपने घर में ही 14 दिन तक क्वेरेंटाइन किया जाए। और लक्षण जादा दिखें तो संबंधित देवता को पूरी तरह से आइसोलेट कर दिया जाए।
नारद जी ने बड़े विनम्र भाव से कहा कि देवराज मैं अभी मृत्युलोक से होकर आया हूँ इसलिए 14 दिन तक कोई भी देवता मुझसे सीधे आकर मिलने की कोशिश न करे। देवभूमि भारत में कोरोना ने सभी दिग्गजों को परेशान कर रखा है।न्यायप्रिय कोरोना सबल और दुर्बल में कोई भेदभाव नहीं करता।इसने महाकवि तुलसीदास जी की चौपाई ‘समरथ को नहीं दोष गोसाईं’ को भी झूठा साबित कर दिया है।मृत्युलोक देवभूमि में अमित,शिव, विष्णु नामधारी दिग्गज भी इसके फेर में पड़ गए और उन्होंने जनता से अपील की है कि कोई भी लापरवाही न करें वरना उनकी तरह समस्या में पड़ सकता है।और कई दिग्गज तो अपनी जान भी गंवा चुके हैं। मृत्युलोक से इस बीमारी की वजह से जो आत्माएँ स्वर्गलोक पहुँच रही हैं उन्हें स्वर्ग की सीमा पर ही 14 दिन तक क्वेरेंटाइन रखा जाए।उसके बाद ही धर्मराज उनके लेखा जोखा पर विचार करें।और जो आत्माएँ पहले आ चुकी हैं और धर्मराज के दफ़्तर के काग़ज़ों को छुआ है या कुर्सियों पर बैठी हैं, उन्हें पूरी तरह से आइसोलेट कर दिया जाए।साथ ही धर्मराज के दफ़्तर और घर को भी सेनेटाइज किया जाए।धर्मराज को 14 दिन बाद ही दफ़्तर आने की अनुमति दी जाए। नारद जी ने इन्द्र को सलाह दी कि वे देवताओं से सीधे ना मिले और वेबिनार के ज़रिये ही सारे देवताओं तक यह संदेश पहुंचाया जाए।नारद जी का शुक्रिया अदा कर देवराज इन्द्र अपने लोक को विदा हुए।
अगले दिन वह वेबिनार के ज़रिए देवताओं से रूबरू हुए और देवलोक में 21 दिन के लॉकडाउन की घोषणा कर दी। ‘एसएमएस’ फ़ॉर्मूला को सख़्ती से लागू किया गया। कोरोना पीड़ित आत्माओं को पूरी तरह से आइसोलेट कर दिया गया।धर्मराज को ख़ास तौर पर सावधानी बरतने के निर्देश दिए गए और नई आने वाली आत्माओं को स्वर्ग की सीमा पर ही 14 दिन तक क्वेरेंटाइन में रखने का सख़्त निर्देश दिया गया।ब्रह्मा विष्णु महेश के निवास पर पूरी तरह से आवागमन प्रतिबंधित कर दिया गया।अब स्वर्ग में मास्क लगाए देवता सोशल डिस्टेंसिंग और सेनेटाइजर के साथ ही वेबिनार, वीडियो कांफ्रेंसिंग के ज़रिए ही बैठकों का आयोजन कर रहे हैं। यह पहली बार है कि आत्माएँ मृत्युलोक से जाकर स्वर्गलोक में भी बेचैन हैं।कोरोना उन्हें मृत्युलोक और देवलोक कहीं भी चैन नहीं लेने दे रहा है।
लेकिन शुरुआत में ही सावधानी बरतने और लापरवाही न करने की वजह से देवलोक में स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है।देवलोक में राजनीतिक गतिविधियों पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया है।देवलोक में न चुने हुए सदस्यों के इस्तीफ़े होंगे और ना राजनीतिक दल पार्टी कार्यालय में भीड़ में सदस्यता दिलाएंगे। चुने हुए सदस्यों की ख़रीद फ़रोख़्त पर भी पूरी तरह से लगाम लगा दी गई है।ब्रह्मा विष्णु महेश अगले तीन महीने तक अपने आवासों में ही रहेंगे और किसी से नहीं मिलेंगे। आदिकाल से अब तक ऐसा पहला मौक़ा है जब मृत्युलोक की किसी महामारी ने देवलोक में भी हलचल पैदा की है और देवता किसी तरह का रिस्क नहीं लेना चाहते।मृत्युलोक के अनुभवों से सीख लेते हुए देवराज इन्द्र ने यह सख़्त हिदायत दी है कि कोई भी कोरोना को डरो ना नहीं कहेगा वरना मृत्युलोक की तरह अंजाम भुगतना पड़ सकता है।

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