भ्रम दूर करेंगे यह उपचुनाव … मतदाता की कड़ी परीक्षा
कौशल किशोर चतुर्वेदी
परिणाम कुछ भी हों लेकिन प्रदेश की 28 विधानसभा सीटों पर तीन नवम्बर को मतदान करने वाले मतदाता कड़ी परीक्षा देने जा रहे हैं। आज चुनाव प्रचार का आख़िरी दिन है और इसके बाद व्यक्तिगत तौर पर मतदाताओं को अपने-अपने पक्ष में लाने की कवायद ज़रूर होगी। हालाँकि यह सब जानते हैं कि मतदाता पूरी तरह से जागरूक ना भी हो तब भी सोच समझ कर ही फ़ैसला लेगा। मतदाताओं की सोच और समझ को नेताओं ने कितना प्रभावित किया, यह चुनाव परिणाम बताएँगे। मूल मुद्दा बिकाऊ-बिकाऊ-बिकाऊ ही अंत तक बना रहा। चुनाव आयोग ने पूर्व मुख्यमंत्री या कांग्रेस की मानें तो भावी मुख्यमंत्री कमलनाथ का स्टार प्रचारक का दर्जा ऐन चुनाव प्रचार ख़त्म होने के दो दिन पहले ही छीनकर मैसेज देने की कोशिश की है लेकिन अगर आयोग संज्ञान लेता तो शायद ज़्यादातर स्टार प्रचारकों की शामत आ जाती। क्योंकि यह उपचुनाव प्रचार के मामले में व्यक्तिगत तौर पर कीचड़ उछालने के लिए भी विशेष तौर पर याद किए जाएंगे।जहाँ मर्यादा की सारी सीमाएं टूटती हुई साफ़ दिखाई दीं।
कांग्रेस ने भाजपा सरकार के ख़िलाफ़ आरोपपत्र पेश किया तो भाजपा ने इसे कांग्रेस द्वारा फैलाया जाने वाला भ्रम बताया।और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष ने पत्रकार वार्ता के ज़रिए कांग्रेस के दो दिग्गज नेताओं कमलनाथ और दिग्विजय सिंह पर आरोपों की झड़ी लगा दी। यदि इसे यह कहा जाए कि भ्रम का जवाब देने के लिए भ्रम का ही सहारा लिया गया, तो ठीक ही है। क्योंकि अक्सर ही हर चुनाव के पहले राजनैतिक दल एक दूसरे पर जिस तरह आरोपों की बौछार करते हैं, सरकार किसी की भी बने लेकिन बाद में कार्रवाई के नाम पर ढाक के तीन पात ही निकलते हैं। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के साथ एक सपा प्रत्याशी से बात करने का ऑडियो जारी हुआ तो भाजपा ने ख़रीद फ़रोख़्त का आरोप कांग्रेस पर लगाकर पासा पलटने की कोशिश की लेकिन जवाबी हमले में पूर्व मंत्री उमंग सिंघार ने ज्योतिरादित्य सिंधिया पर ही 50 करोड़ का ऑफ़र देने और ख़रीद फ़रोख़्त का गंभीर आरोप जड़ दिया। नंगे- भूखे, पैरों की धूल नहीं, आइटम, ग़द्दार, कमरनाथ,बंटाढार आदि जुमलों सहित सरकार और व्यक्तिगत तौर पर घोटालों के आरोपों की झड़ी लगाने में दोनों ही दलों के नेताओं ने कोई कसर नहीं छोड़ी।अब क़यास लगाए जा रहे हैं और दावे किए जा रहे हैं। तीन नवंबर को मतदान के बाद एक बार फिर अलग अलग सर्वे यह दावा करेंगे कि किस दल को कितनी सीटें मिलने जा रही है लेकिन मतदाता मौन है। राजनैतिक दल, प्रत्याशी और उनके समर्थक मुखर है।
28 में से 25 विधानसभा उपचुनाव कांग्रेस विधायकों के इस्तीफ़ा देकर भाजपा से चुनाव लड़ने का दृश्य दिखा रहे हैं। कांग्रेस का चुनावी एजेंडा मुख्य रूप से इसके इर्द-गिर्द ही केंद्रित है। यहीं से मतदाताओं को बिकाऊ-टिकाऊ और ग़द्दार-वफ़ादार का संदेश देने की कोशिश कांग्रेस ने की है।कांग्रेस ने इसके अलावा 15 महीने के कामों और भाजपा पर लगाए गए घोटालों के आरोप को अपना मूल आधार बनाया है। साथ ही भाजपा सरकार के पिछले 15 साल और वर्तमान सात महीने के कामों पर सीधा निशाना साधकर मतदाताओं को साधने की कोशिश की है।
तो भारतीय जनता पार्टी ने 15 महीने की कांग्रेस सरकार में हुई गड़बड़ियों और सात महीने के भाजपा सरकार के कामों के साथ ही कांग्रेस कार्यकाल में हुए घोटालों, किसानों,गरीबों के मामले में कांग्रेस की ग़लत सोच और असफलता, बल्लभ भवन को दलालों का अड्डा बनाने और भ्रष्टाचार के आरोप लगाकर मतदाताओं का मन भाजपा के पाले में लाने की कोशिश की है।
ख़ैर तमाम आरोपों-प्रत्यारोपों और स्टार प्रचारकों द्वारा उड़नखटोलों में उड़-उड़कर मतदाताओं को रिझाने का समय अब ख़त्म होने जा रहा है। रंगमंच पर स्टार प्रचारकों के अभिनय का दौर पूरा हो चुका है। मतदाताओं ने भी सभी अभिनेताओं की भूमिकाओं को क़रीब से देखा है। कम अवधि और दीर्घावधि की फ़िल्मों पर तालियां भी ख़ूब बजायी हैं लेकिन मतदाता अब यह बताने जा रहे हैं कि किस फ़िल्म की स्क्रिप्ट बेहतर है और किसकी फ़्लॉप हैं। मतदाताओं का फ़ैसला जहाँ राजनैतिक दलों के भ्रम को दूर करेगा लेकिन बटन दबाने तक मतदाताओं को भी कड़ी अग्नि परीक्षा के दौर से गुज़रना होगा। कमलनाथ की आँखों के सामने मुख्यमंत्री की कुर्सी है तो शिवराज सिंह चौहान मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठे हुए हैं। ज्योतिरादित्य सिंधिया ने मतदाताओं को सिंधिया घराने का ही वास्ता दे दिया है तो पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती, केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष विष्णु दत्त शर्मा ने भी मतदाताओं को मोहने के लिए कड़ा परिश्रम किया है।