Ab phir taale may band hogi takhdeer article by Kaushal kishore Chaturvedi

अब फिर ताले में बंद होगी तक़दीर …

कौशल किशोर चतुर्वेदी

अब प्रदेश के रहवासियों को कोरोना के चंगुल से बचाने के लिए सरकार एक बार फिर लॉकडाउन के प्रयोग पर अमल करने जा रही है। दफ़्तरों के लिए पहले ही गाइडलाइन जारी कर दी गई है। कर्मचारियों की संख्या में कटौती की गई है तो कोरोना संक्रमण मिलने पर तालाबंदी का प्रावधान है। लॉकडाउन त्रासदी से गुज़र चुके नागरिक यह शब्द फिर से सुनकर परेशान हैं। उन्हें यह डर सता रहा है कि क्या वही पुराने दिन लौटने वाले हैं जब लोग पाबंदियों से उकताकर विद्रोह पर उतारू हो गए थे। सड़कों पर इंसानों की दुर्दशा का गवाह आकाश, हवा और सूरज-चाँद सभी बने थे।कड़ी धूप में रूप भूख-प्यास की मार खाने को मजबूर था। लोग बस यही सोचकर सरकारों और शहरों से बग़ावत कर चुके थे कि अब मरेंगे तो अपने गाँव में, जलेंगे तो टोले के श्मशान में, दफन होंगे तो वतन की मिट्टी में। न जेब में पैसा था, न खाने को दाना था, न सोने का ठिकाना था। कोई पाँव-पाँव सैकड़ों किलोमीटर के सफ़र पर निकला था, तो कोई साइकिल पर सवार होकर घर की तरफ़ चलने को मजबूर था तो मज़दूरों की दुर्दशा का ठिकाना न था। वह भी देश को विश्व गुरू बनाने का लक्ष्य लिए बैठी सरकार के राज में। खैर लोग अब डर इसलिए रहे हैं कि कही वहीं बीते हुए दिन फिर से लौटकर तक़दीर पर ठोकर मारने वाले तो नहीं हैं। कहीं तक़दीर फिर से ताले में बंद होने वाली तो नहीं है जब न रोज़गार छिन जाएगा, रोटी के लिए निगाहें राह तकती रहेंगी तब सांसें चलती रहें उतना अन्न नसीब होगा और कोरोना का मर्ज़ दिखा तो पूरा परिवार ही मौत की कगार पर खड़ा होगा। सरकारों के दावों से गरीब, मज़दूर और मजबूरों के घर के न तो दिए जलते हैं, न पेट भरते हैं और न ही सपने सच होकर अच्छे दिन ही आते हैं। पहले तक़दीर को एक झटके में हलाल किया गया था, अब तक़दीर को टुकड़ों-टुकड़ों में हलाल किया जाएगा। भोपाल में 24 जुलाई को रात 8 बजे से यानि कि 25 जुलाई को सुबह से पूरा भोपाल 10 दिन के लिए लॉकडाउन रहेगा। अब दस दिन के लिए राशन पानी लेकर घरों में बंद होने की तैयारी करना है। अब सरकार में वही लोग हैं जो कभी सरकार में आने के लिए पुरानी सरकार की चिरौरी करते थे कि कोरोना है डोरोना नहीं है। खैर अब टुकड़ों टुकड़ों में तक़दीर को ताले में बंद करने की सजा मिलना ही नियति है। ऐसा ही कुछ इंदौर या दूसरे संक्रमित शहरों के साथ घटने वाला है। प्रदेश में जल्द ही 25 हज़ार संक्रमित होंगे तो मौत का आँकड़ा 800 पार होगा। इंदौर में मरीज 7000 की तरफ़ बढ़ रहे तो मौत का आँकड़ा 300 पार हो चुका है,भोपाल में मरीज 5000 की तरफ़ बढ़ रहे तो मौत का आँकड़ा 150 पार होने को बेताब है। खैर यह तय हो गया है कि सरकारें तक़दीर नहीं बना सकतीं, बस ताले लगा सकती हैं। बाक़ी तो ऊपर वाला ही जाने।

खैर मध्यप्रदेश की सरकार को जितनी चिंता में कोरोना ने डाला है, उससे ज़्यादा चिंता में उन 26 विधानसभा सीटों पर उपचुनावों ने डाला है जहाँ हमेशा से कट्टर दुश्मन रहे चेहरों को सबसे बड़ा हमदर्द मानकर पार्टी ने तो दिल से लगा लिया है लेकिन अभी यह भरोसा पैदा नहीं हो पा रहा है कि पार्टी के लाखों कार्यकर्ता अपना प्यार उन पर लुटाने का मन बना पाएँगे या नहीं। वहीं सबसे ज़्यादा डर अपनों के ही ख़फ़ा होने का है।यह वही अपने हैं जिनका हक मारा जा रहा है और जिनकी तक़दीर छीनने से पहले उन्हें आहट भी नहीं होने दी गई।मन को समझा सकें इतना वक़्त भी नहीं दिया गया। अब उनकी आँखों के सामने अंधेरा भविष्य तांडव कर रहा है और कह रहा है कि अब उनकी और उनके उत्तराधिकारियों की तक़दीर पर हमेशा-हमेशा के लिए ताला लटकने वाला है। यहाँ तो टुकड़ों-टुकड़ों जैसा हिसाब भी पार्टी के वास्तविक हक़दारों को नज़र नहीं आ रहा।

तक़दीर की तीसरी तस्वीर संघ से जुड़ी है। संघ अपनी तक़दीर बदलने के लिए पाँच दिन का मंथन मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में कर रहा है। संकट है कि कोरोना में शाखाओं की तक़दीर पर ताला लटक गया है। स्वयंसेवक घर का सेवक बनकर रह गया है। न प्रशिक्षण न बैठकें न प्रवास, फिर कैसे चलेगी संघ की साँस।आज दुनिया में सशक्त सरकार के निर्माता , अपनी तक़दीर पर ताला लटकता देख हैरान हैं।क़िस्मत बदलने के लिए चिंतन-मनन और मंथन चल रहा है।
कांग्रेस सरकार में वापसी का सपना देखकर तक़दीर बदलने में जुटी है। नाथ की वापसी हो तो बहुत से चेहरे अनाथ होने से बच जाएँगे। नादान कोरोना उनकी तक़दीर पर ताला लटकने से नहीं बचा पाया था।अब हो सकता है कि नौजवान कोरोना उनकी क़िस्मत का ताला खोल दे।कोरोना की तक़दीर में भी रोना ही लिखा है कि एक की तक़दीर का ताला खोलता है तो दूसरे की तक़दीर पर ताला लटक जाता है।

Leave a Comment

Do NOT follow this link or you will be banned from the site!