तुम्हारी भी जय-जय, हमारी भी जय-जय कौशल किशोर चतुर्वेदी, भोपाल।

तुम्हारी भी जय-जय, हमारी भी जय-जय

कौशल किशोर चतुर्वेदी, भोपाल।

प्रदेश में कोरोना का कहर जारी है। कोरोना संक्रमण 51 जिलों में फल-फूल रहा है। 52 वाँ जिला निवाड़ी रामराजा की कृपा से फ़िलहाल संक्रमणमुक्त है। ओरछा के रामराजा मंदिर की महिमा विख्यात है और ओरछा में विराजे लाला हरदौल भी लोकदेवता के बतौर बुंदेलखंड में पूजे जाते हैं। ख़ास बात यह भी है कि आजकल नवनिर्मित निवाड़ी जिले के कलेक्टर अक्षय सिंह भी ओरछा में ही निवास करते हैं। और निश्चित तौर से हर रोज़ रामराजा से जिले की कुशलता की कामना करते होंगे। यह इसलिए लिख रहा हूँ क्योंकि संसाधनों के मामले में निवाड़ी में अब तक जिला जैसी व्यवस्थाएँ नहीं हो पाई हैं। हो सकता है संसाधनों के अभाव में मरीज सीधे झाँसी पहुँच रहे हों या फिर गुमनामी में बीमारी सहित विदा ले रहे हों। खैर फ़िलहाल तो निवाड़ी जिला को उपलब्धि का तमग़ा हासिल है। हालाँकि पास में उत्तरप्रदेश के झाँसी जिला की सीमा है जहाँ मरीज भी मिले हैं और कोरोना से मौत भी हुई हैं, तो दूसरी तरफ़ मध्यप्रदेश का टीकमगढ़ जिला है जहाँ भी कोरोना मरीज मिल चुके हैं और मौत दर्ज हो चुकी है।

बुधवार को ब्रेकिंग न्यूज़ यह रही कि राजधानी में 78 कोरोना पॉजिटिव के मामले सामने आए। इस ब्रेकिंग न्यूज़ के साथ ही प्रदेश में कोरोना संक्रमित हुए मरीज़ों का आँकड़ा दस हज़ार पार कर गया है। 9 जून तक स्टेट हेल्थ बुलेटिन के मुताबिक़ कोरोना संक्रमित मरीज़ों की संख्या 9849 थी। मौतों की संख्या 420 बताई गई थी। 51 जिलों में संक्रमण तो 31 जिलों में मौत दर्ज के आँकड़ों की सूची स्टेट हेल्थ बुलेटिन में दर्ज थी। बाद में अपडेट हुए भोपाल और इंदौर जिले के बुलेटिन को शामिल कर कोरोना संक्रमित की संख्या 9947 पर पहुँची थी तो मौत का आँकड़ा 423 हो गया था। यह ग़ौर करने की बात है कि स्टेट हेल्थ बुलेटिन भी सही तस्वीर सामने नहीं रखता और जिलों की जानकारी अलग ही रहती है जबकि सरकार एक दिन पीछे दौड़ती रहती है। हो सकता है कि दूसरे जिलों का अपडेट भी शामिल हो जाए तो आँकड़ा एक दिन पहले ही दस हज़ार पार कर गया हो। सब कुछ भगवान भरोसे है।

खैर बहुत सारी बुरी ख़बरों को समेटे स्टेट हेल्थ बुलेटिन खुशी के भी कम मौक़े नहीं देता। मौत के रंगों से सजा बुलेटिन खुशी के रंग बिखेरने में भी बढ़त बनाए हुए है। इसीलिए सरकार भी इसकी खुबसूरती पर इतराने के लिए तत्पर रहती है।उदाहरण के लिए 9 जून का स्टेट हेल्थ बुलेटिन कहता है कि प्रदेश में एक्टिव केस 2700 है और ठीक हो चुके मरीज़ों की संख्या 6729 है। यानि ख़ुश होने के लिए भी हमारे पास पूरा आसमान है। मौत के आसमान से ढाई गुना ज़्यादा।
ब्रेकिंग न्यूज़ की यह हक़ीक़त पीछे नहीं धकेली जा सकती है कि अब तक एक दिन में राजधानी में सबसे ज्यादा 78 मामले सामने आये हैं जो चिंता की बात है। भोपाल में जहांगीराबाद के एक ही इलाके से 17 लोग पॉजिटिव मिले।वही जहांगीराबाद जो पहले से हॉटस्पॉट का ख़िताब हासिल किए है। तो C21 मॉल के 108 एम्बुलेंस कॉल सेंटर में 13 पॉजिटिव मिले। जिसकी भयावहता को कम कर नहीं आँका जा सकता। कुछ इसी तरह की स्थिति पूरे प्रदेश की है। इंदौर, भोपाल, उज्जैन, बुरहानपुर,नीमच, जबलपुर, खंडवा, खरगोन, ग्वालियर, धार, मंदसौर सहित ढाई दर्जन जिले विकट दौर से गुज़र रहे हैं। तो 52 में से 51 जिले कोरोना की सूली पर चढ़े हुए हैं।

राहत की बात यह है कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने प्रदेश में कोरोना नियंत्रण के लिए मध्यप्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा की तारीफ़ की है। इंदौर में रिकवरी रेट 64 फ़ीसदी होने पर भी ख़ुशी जताई है तो भोपाल के बेहतर परफ़ॉर्मेंस को भी सराहा है।यह लिखते-लिखते तक ख़बर आई है कि प्रदेश में रिकवरी रेट 68.6 प्रतिशत पहुँच चुका है। सरकार के लिए जय-जय करने को रिकवरी रेट का हर्ष फ़ायर है तो कोरोना खुद की जय-जय करने के लिए मौतों की बढ़ती संख्या और मरीज़ों की संख्या में हो रहे इज़ाफ़े का दामन थामे है। सरकार और कोरोना में तुम्हारी भी जय-जय और हमारी भी जय-जय के इन जयकारों के बीच आम आदमी सरकार से भी डरा हुआ है और कोरोना से भी।

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