ख़त्म राज्यसभा का समर, अब उपचुनाव की कठिन डगर कौशल किशोर चतुर्वेदी

ख़त्म राज्यसभा का समर, अब उपचुनाव की कठिन डगर

कौशल किशोर चतुर्वेदी

मध्यप्रदेश राज्यसभा चुनाव में सब कुछ वैसा ही हुआ जो पहले से अपेक्षित था। महाराजा की बग़ावत के बाद पांसा पलट चुका था। यदि ऐसा न होता तो भाजपा उम्मीदवार से रिक्त हुई दो सीटों में से एक पर इस समय कांग्रेस का क़ब्ज़ा हो गया होता। यानी रिक्त हुई तीन सीटों में से दो कांग्रेस को और एक भाजपा को मिलती। और ज्योतिरादित्य सिंधिया के भाजपा में जाने और कांग्रेस के 22 विधायकों के इस्तीफ़ा देने के बाद न केवल कांग्रेस मध्य प्रदेश में सरकार से बेदख़ल हुई बल्कि राज्यसभा की एक सीट का भी खामियाजा भुगतना पड़ा है।कुल मिलाकर यह कहा जा सकता है कि राज्य सभा का समर सुनिश्चित परिणामों के साथ ख़त्म हो चुका है लेकिन अब असली कठिन डगर की शुरुआत हो चुकी है और दोनों ही दलों के सामने 22 वह उपचुनाव कसौटी बन कर सामने हैं जिन पर खरा उतरना कठिन चुनौती है। राज्यसभा चुनाव जीतने के बाद 57 वोट पार्कर कांग्रेस के दिग्विजय सिंह, 56 वोट हासिल कर भाजपा के ज्योतिरादित्य सिंधिया और 55 वोट हासिल कर भाजपा से सुमेर सिंह सोलंकी राज्य सभा में मध्य प्रदेश का प्रतिनिधित्व करेंगे। 36 वोट लेकर फूलसिंह बरैया राज्य सभा में जाने से वंचित हो गए हैं। वहीं दो मत निरस्त हुए हैं। इस तरह मध्य प्रदेश विधानसभा का 206 सदस्यों का लेखा जोखा सम्पन्न होता है।

अब असली परीक्षा-
राज्य सभा का हिसाब किताब बराबर होने के बाद अब मध्य प्रदेश में कांग्रेस और भाजपा की असली परीक्षा है। कांग्रेस का दावा है कि किसान कर्ज़ माफ़ी, कन्या विवाह की राशि 28000 से बढ़ाकर 51000 करना, माफ़िया राज के ख़िलाफ़ कड़ी कार्रवाई करना, अवैध खनन पर अंकुश लगाना सहित प्रदेश के विकास के लिए काम कर रही कांग्रेस सरकार को कांग्रेस विधायकों की ख़रीद फ़रोख़्त के ज़रिए गिराया गया है।भाजपा नेताओं को उनके ख़िलाफ़ कार्रवाई की आशंका थी जिसके चलते ऑपरेशन लोटस को अंजाम देकर प्रजातंत्र का गला घोंटा गया है। प्रदेश की जनता इसके लिए भाजपा को माफ़ नहीं करेगी। कांग्रेस को पूरा भरोसा है कि उपचुनावों में 21-22 सीटें उसके खाते में आएंगी। कांग्रेस के पास यहाँ अपनी 15 महीने की उपलब्धियां गिनाने को है तो कमलनाथ और दिग्विजय सिंह का लंबा राजनीतिक अनुभव है।वहीं प्रजातंत्र की दुहाई देकर जनता का दिल जीतने का मौक़ा भी है।
दूसरी तरफ़ भारतीय जनता पार्टी कांग्रेस के ऐसे दावों को ख़ारिज कर रही है।मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और गृह मंत्री डॉक्टर नरोत्तम मिश्रा के साथ ही प्रदेश भाजपा अध्यक्ष वीडी शर्मा उप चुनावों में अच्छे परिणामों को लेकर आश्वस्त हैं।वैसे भी भाजपा को सरकार बनाए रखने के लिए बमुश्किल गिनी चुनी सीटें जीतने की ज़रूरत है। ऐसे में जनता प्रजातंत्र की कसौटी पर खरी भी उतरे और भाजपा की झोली में पाँच सीटें भी आ गईं तब भी उन्हीं निर्दलीय और सपा-बसपा विधायकों को साथ लेकर भाजपा सरकार की गाड़ी चलती रहेगी।इस कांग्रेस की क़िस्मत तभी चमक सकती है जब जनता भाजपा को पूरी तरह से ख़ारिज कर उपचुनाव में सिर्फ़ और सिर्फ़ कांग्रेस के लिए वोट करें जो कि संभव नहीं है। हालाँकि मतदाता ठान ले तो कुछ भी असंभव नहीं है।

रोचक होंगे उपचुनाव –
कुल मिलाकर विधानसभा चुनावों से ज़्यादा रोचक मध्य प्रदेश में होने वाले यह उपचुनाव हो गए हैं। सबसे कड़ी परीक्षा हाँ मैं उन पूर्व मंत्रियों की है जो कांग्रेस में थे और अब भाजपा के टिकट पर मैदान में जाएंगे।तो कांग्रेस से इस्तीफ़ा देने वाले बाक़ी विधायकों की अग्नि परीक्षा के साथ कमल का निशान भी कसौटी पर है। कांग्रेस को जो खोना था वह खो चुकी है पर अब सरकार में बने रहने और बेहतर करने की चुनौती से भाजपा को ही जूझना है।कहीं न कहीं पूरा चुनाव सिंधिया के इर्द-गिर्द भी रहेगा जो आज़ादी से पहले से लेकर आज़ादी के बाद अब तक का इतिहास मतदाताओं के सामने परोस कर सही ग़लत के भँवरजाल में उलझाएगा।

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